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हनुमान जी के जीवन के 30 छोटे प्रसंग — और हर प्रसंग के बाद एक छोटा काम, जो बच्चा उसी दिन करता है और फिर अपने हाथ से लिखता है कि क्या हुआ। 8–12 साल के बच्चों के लिए, 80 पन्ने, बिना तारीख़ के।
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हर हिस्से की अपनी शुरुआत, अपने प्रसंग और अपने छोटे काम। रोज़ दस मिनट — एक प्रसंग, एक गुण, एक काम, और फिर बच्चे की अपनी लिखावट।
हर दिन के नीचे लिखा है कि प्रसंग कहाँ से लिया गया — रामचरितमानस, वाल्मीकि रामायण, या लोक-परंपरा।
आपके बच्चे ने हनुमान जी की कहानियाँ सुनी हैं। शायद चालीसा भी पढ़ता है। सवाल यह नहीं कि उसे कहानी आती है या नहीं — सवाल यह है कि उसमें से कुछ उसके दिन में उतरता है या नहीं। यह किताब उसी के लिए है।
एक प्रसंग पढ़िए · उसमें दिखा गुण देखिए · और आज का छोटा काम कीजिए। फिर बच्चा तीन लाइनों में लिखता है कि क्या हुआ — या चाहे तो बनाकर दिखा देता है।
न पैसा चाहिए, न किसी से इजाज़त।
और वह दिन जब कोई चीज़ ध्यान बँटाए — फ़ोन, टीवी, खेल — तो बच्चा कहना सीखता है: "काम के बाद।"
मुख्य रूप से गोस्वामी तुलसीदास के रामचरितमानस से — विशेषकर सुंदरकांड। जहाँ प्रसंग वाल्मीकि रामायण से है, पन्ने पर उसका संकेत है। जहाँ लोक-परंपरा से है, वह अलग से लिखा है। हर दिन के नीचे यह लिखा मिलेगा।
80 पन्ने · बिना तारीख़ के · 30 प्रसंग · 30 छोटे काम · लिखने की जगह हर दिन · 30 दिन का नक्शा · और अंत में वे सारे काम एक जगह, जो बच्चे ने सच में किए।
8–12 साल के बच्चों के लिए। जिस दिन खोलिए, दिन 1 वहीं से — किताब में मंगलवार से शुरू करने का सुझाव है।
पूरे भारत में डिलीवरी। कैश ऑन डिलीवरी उपलब्ध है, और ऑनलाइन पेमेंट पर छूट मिलती है।
यह किताब बच्चा भरता है। इसीलिए तीस दिन बाद यह किसी और की किताब नहीं रहती — उसकी अपनी हो जाती है।
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